Straight from the core heart....

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Tuesday, February 19, 2013

तेरी झलक

 कल्पवृक्ष  की सोनजुही तू ,अमलतास की अमल कली
तेरी आंख खुली तो सुबह हुयी , जो पलक झुके तो शाम ढली !
 सरकार की नाराजगी कुछ ऐसी हुयी की
मौसम ने भी रुख  बदल लिया
आसमा ने आंसू बहा दिए ,बादल  चीखने  लगे !
अब तुम जरा सी मुस्कुरा दी तो सूरज भी बादलो के पीछे से तुम्हे देखने लगा "-
सूरज ही नहीं  हवा भी झूम उठी ,तेरी मुस्कान  का जादू कुछ ऐसा चला
कि  पत्ते  नाचने लगे  और पंछी गाने लगे ,
भँवरे फूलो पे मडराने लगे ,
कभी धुप कभी छाव  ,तो कभी बारिश
सब तेरी झलक पाने के लिए कुदरत के बहाने लगे !

खबर मिली है'- नदिया , झरने
फूल बगीचे , सावन के पंछी
बारिश बादल , मोर पपीहा
वंशीवट की वंशी
म्रदुभासी  म्रदु गान कर रहे
कपटी  सब चालाक  हुए है
सब तुझको प्यार  कर रहे !!
                                                           -Jagesh 

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