जीवन के दिन, छोटे सही, हम भी बड़े दिल वाले
कल की हमें, फ़ुर्सत कहाँ, सोचें जो हम मतवाले
जीने का रँगीन मौसम, ये खूबसूरत ज़माना
अपने यही चार पल हैं, आगे है क्या किसने जाना
जीना जिसे आता है वो, इनमें ही मौज मना ले
कल की हमें फ़ुर्सत कहाँ...
अपनी ज़िंदगी की भी कुछ यही कहानी है दोस्तो,
इस वर्ष के सफर की शुरुआत मे जो तथाकथित प्रेम के चलते ये आवारा मन कही ठहर सा गया था दूर देश मडराता भंवरा एक फूल की मादकता पर खो सा गया था, मग़र प्रकृती का नियम के अनुसार जो खिलता है वो एक दिन मुरझा जाता है बस उस पुष्प के मुरझाने से शुरुआती सपनो की नगरी मुम्बई का सफर रास नहीं आया !
शिर्दी के साई , त्रियांकेश्वर दर्शन से मन पावन कर फिर सतरंगी देश की कला के रंग मे रंगने निकल पड़ा
सतपुडा के घने जंगल, बेतुल का आदिवासी क्षेत्र का भ्रमण उनका जन जीवन और दरिद्रता देख जहां यह मन दुखित हुआ वही उनकी कला देख प्रफुल्लित भी हुआ ,ग्राम लालावादी के जूट शिल्पकारो का चयन, मिलन, प्रेम इस वर्ष की महत्वपूर्ण उपलब्धी रही !
तो वही होशीआरपुर , पंजाब का रंगीला कल्चर, वहा का भोजन भाषा और सत्कार ,अमृत्सर का गोलडन टेंपल, ऐतिहासिक फुलकारी और लकडी की नाक्काशी, एक साथ 250 शिल्पकारो से सिखाने के ऊदेश्य से रूबरू होना और बहुत कुछ सीख जाना और भी कयी खट्टे मीठे अनुभव से भरा यह अध्याय भी इस वर्ष फलदायी रहा !
फिर एक बार मेरा साउथ भारत से प्यार मुझे देश के सर्वश्रेष्ठ लोगो के पास लाया करनातका बेंगलूरू का मेट्रो जीवन का आनन्द ,चन्नापतन का अदभूत लकडी के खिलौने का शिल्प, मैसुरू शहर की रौनक, प्राकृतिक सौंदर्य के अकल्पनिय नजारे ,
तिरूपती बालाजी का अदवितिय् स्वरूप, तिरुमाला घाट के मनमोहक दृष्य, इडली डोसा टिफन, कालाहस्ती की कलमकारी,
और मादवमाला का लकडी की अदभूत नाक्काशी , साउथ भारत की ग्रामीण जीवन शैली, तेलूगु बागुनारुम, गाव वालो का " हिन्दी वाला भिया, दिल्ली वाला सार " संबोधन !
भारत भ्रमण के इस सिलसिले मे मेरी ज़िंदगी किसी रेलगाड़ी सी चली जा रही है, ज़िसकी मंजिल मैं नहीं ज़ानता बस मेरे देश की अदभूत कलाओ को जिन्दा रखने वाले हजारो लोगो का प्यार समेटते हुये चला जा रहा हू!
और बहुत सी मीठी यादो का यह वर्ष 2016 को नमन करते हुये अलविदा कहता हू और नव वर्ष मे एक नये उत्साह के साथ आदरणीय गुरूजनो, मम्मी पापा के आशिर्वाद और बहनो के प्यार के साथ एक नयी सुबह का स्वागत करता हू यह वर्ष आप सबके लिये खुशियो से भरा रहे ऐसी प्रार्थना करता हू!
जागेश