Straight from the core heart....

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Sunday, February 16, 2014


"दृष्टिकोण "

ख्वाब देखती निफ्ट मंडली , करती अपना सर्वस्व समर्पित
अपनी पूरी तन्मयता से, ख्वाब सजाती करती अर्पित।
बस यही सोचती है वो हर पल ,कैसे लगे भविष्य की आँख में काजल
फैशन जगत का केंद्र बिंदु अपना कार्यस्थल
विश्व का सर्वोच्च स्थान है अपना कल।

बस एक दशक की सीमा लाँघ ,
 देता विश्व को ख्याति और प्रतिष्ठा की ललकार
मेरे दृष्टिकोण में मेरा निफ्ट
भारतीय संस्कृति की मारता हुंकार


 बड़ी अट्टालिकाओं और आधुनिकता का  जो न हो मोहताज  
 मेरे दृष्टिकोण में ,
 नयी नयी तकनीको का कर स्वागत ,
 निफ्ट बदलता अपना आज।



मेरे दृष्टिकोण में मेरा निफ्ट प्रांगण ,किये सुशोभित कई आभूषण
हरे वस्त्रो का ऐसा है आवरण , जिसे देख खुश होता पर्यावरण
जिसे देख हँसता पर्यावरण।
कुछ करने कि होड़ में जब ये मंडली जुटती एक बार ,
नयी तकनीक और नए विचारो का लगता अम्बार
जिसे देख नतमस्तक होता  संसार।

देश विदेश के दूर सुदूर  में बसी कला को
उन्नत करने का सपना देखा है ,
अपने इस दृष्टिकोण में मैंने
हर कलाकार को अपना बनते देखा है

हम महनत और लगन से एक ऐसा बाजार सजायेंगे
जहाँ मिटटी भी होगी मूल्यवान ,
जिसे देख सभी करे गुणगान
फैशन जगत में हम  अपना परचम लहराएंगे
 हम निफ्ट को खूब सजायेंगे , हम निफ्ट को खूब सजायेंगे।

-
जागेश्वर 


Tuesday, February 4, 2014

"जी करता है"

जी करता है पंछी बन उड़ जाऊ,
उचाइयो तक जाकर उस नील गगन को छू पाऊ,
घूमू  उस आजाद गगन में।, सबका मन हर्षाऊ
 कलियाँ तो बहुत है इस दुनिया में , पर अपनी एक अलग पहचान बनाऊ
कुछ करू ऐसा जग में कि अपना नाम कर जाऊ 
मक बाप का नाम रोशन करके , गर्व से उनको भर पाऊ

कभी जी करता है , सागर कि लहरें  बन जाऊ
और उस सफलता के तट को बारम्बार छूती जाऊ
या फिर ऊचाई से बहते उस सुन्दर झरने से गिरकर
शीतल बहती नदिया संग मिलकर अपना लक्ष्य हासिल कर जाऊ \

कभी जी करता है , फलो कि मधुर सुगंध बनकर
सबको मंत्र मुग्ध कर जाऊ।
जीवन में खुशिया भरकर , सबको आनंदित कर जाऊ
या इंद्रधनुष बन कर बेरंग लोगो की दुनिया को सतरंगी कर जाऊ
जी करता है , कभी छत बनकर बेसहारो को सहारा दे पाउ
जो पार न कर पाये , उनका पुल बनकर नदिया पर कराऊ।
या कभी शीतल जल बनकर ,प्यासे की प्यास बुझाऊ।
या ठंडी ठंडी हवा बनकर में ,गर्मी से व्यथित लोगो को राहत पंहुचा पाऊ।

बुजुर्गो की लाठी बनकर में,ढेर सारा आशीर्वाद  पाऊ
या बच्चो का तोहफा बन उनके मन को हर्षाऊ।
जो रहते है दुखी , उनकी ख़ुशी बनकर मन को आनंद से भर जाउ ,
या रुमाल बनकर किसी के , आँसुओ को पूछ जाऊ।

पर डरता है मन मेरा भगवन कही बना न देना मुझको पैसा ,
कहीं किसी के घमंड का कारण न बन जाऊ
बना न देना मुझको वो ऐशो आराम ,
कि महनत क्या होती है वही भूल जाऊ।
किसी के खेतो कि फसल बनकर
हवा संग खूब झुमु और लहराऊ
चाँद सा सुन्दर मोती बनकर
किसी कि शोभा में बन जाऊ
या जगमग जगमग  सितारा बनकर
सबसे तेज झिलमिलाऊ ,
या कोई मधुर धुन बनकर कानो में मिश्री सी घुल जाऊ।
                                                           

                                                              - सौम्या अग्रवाल
                                                                  TD -4
                                                                निफ्ट भोपाल