Straight from the core heart....

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Thursday, February 21, 2013

"मेरी गुडिया अब बड़ी हो गयी है"

देख रहा था
आज अपनी  गुडिया को
सजते संवरते
शीशे में खुद को निहारते
नयनो में आस का काजल लगाते ,

उसके दुपट्टे को बार बार सरकते
और फिर अपनी उलझी लटो  को सुलझाते !

मुझसे अपनी बात छिपाते
अकेले में खुद से सवाल करते
फिर शरमा के सर को झुकाते !
हँसकर  बोल दे अपने दिल की हर बात 
और फिर कभी स्तब्ध मौन हो जाते
कभी कभी आँखों से आंसु बहाते
कभी अपनी सखियों संग हँसते खिलखिलाते !

देखकर उसको लगता है मुझे ,
प्यार में और भी  प्यारी हो  गयी है
मेरी गुडिया अब बड़ी हो  गयी है !!!

                                                          -Jagesh 

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