देख रहा था
आज अपनी गुडिया को
सजते संवरते
शीशे में खुद को निहारते
नयनो में आस का काजल लगाते ,
उसके दुपट्टे को बार बार सरकते
और फिर अपनी उलझी लटो को सुलझाते !
मुझसे अपनी बात छिपाते
अकेले में खुद से सवाल करते
फिर शरमा के सर को झुकाते !
और फिर कभी स्तब्ध मौन हो जाते
कभी कभी आँखों से आंसु बहाते
कभी अपनी सखियों संग हँसते खिलखिलाते !
देखकर उसको लगता है मुझे ,
प्यार में और भी प्यारी हो गयी है
मेरी गुडिया अब बड़ी हो गयी है !!!
-Jagesh
आज अपनी गुडिया को
सजते संवरते
शीशे में खुद को निहारते
नयनो में आस का काजल लगाते ,
उसके दुपट्टे को बार बार सरकते
और फिर अपनी उलझी लटो को सुलझाते !मुझसे अपनी बात छिपाते
अकेले में खुद से सवाल करते
फिर शरमा के सर को झुकाते !
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| हँसकर बोल दे अपने दिल की हर बात |
कभी कभी आँखों से आंसु बहाते
कभी अपनी सखियों संग हँसते खिलखिलाते !
देखकर उसको लगता है मुझे ,
प्यार में और भी प्यारी हो गयी है
मेरी गुडिया अब बड़ी हो गयी है !!!
-Jagesh

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