कहाँ साहिल , कहां मज़िल |
कहां है जाँ, कहाँ है दिल |
जो देखूं गौर से तुझको,
तो बेगैरत हूं, आवारा |
जो न देखूं, तो कहती है,
मुझे बुज़दिल, मुझे बुज़दिल |
तेरे दीदार की ख़ातिर,
मैं खुद को रोक कर बैठा |
तू या तो इश्क-ए-वफ़ा दे दे,
या फिर कत्ल कर कातिल |
खुद मैने कब्र मे अपनी,
लिखा दी घड़ी मरने की |
ख्वाहिश मे मिलाने की,
तेरा दिल और मेरा दिल....
दीपक त्रिपाठी
24/03/2012
कहां है जाँ, कहाँ है दिल |
जो देखूं गौर से तुझको,
तो बेगैरत हूं, आवारा |
जो न देखूं, तो कहती है,
मुझे बुज़दिल, मुझे बुज़दिल |
तेरे दीदार की ख़ातिर,
मैं खुद को रोक कर बैठा |
तू या तो इश्क-ए-वफ़ा दे दे,
या फिर कत्ल कर कातिल |
खुद मैने कब्र मे अपनी,
लिखा दी घड़ी मरने की |
ख्वाहिश मे मिलाने की,
तेरा दिल और मेरा दिल....
दीपक त्रिपाठी
24/03/2012