Straight from the core heart....

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Wednesday, August 7, 2013

लतिका


स्वछंद हवा  मे  , अनंत  आकाश मे
अपने  नयनो  मे भरपूर  उजाला भर
अपने पंखो को नयी ऊर्जा  से सक्षम कर
क्षितिज के उस पार , इतनी  ऊँची उड़ान भर
की सारा विश्व तुम्हे देखता ही रह जाये

उत्साह का ताना बना , साधना का बाना सजा
जीत का संसार बुन , गुनगुना अपनी ही धुन
ज़माने से न तू डर , सामना ह्रदय से कर
सम्पूर्ण आलेख मे कर अपने हस्ताक्षर

भटक तू आज दर बदर , मार्ग अपना प्रशस्त कर
सातों सागर पे अपना नाम लिख ,
 सातों आसमान पार कर
 जिसे देख सदियों तक लोग
मंत्रमुग्ध ही रह जाये

मन की वीणा के तार को
फिर एक बार झंकृत कर
स्वरमय बना  दे  कर्मभूमि  तू ,
बहने दे सुमधुर स्वर लहर
कि सारी सृष्टि उसके सम्मोहन मे डूब जाये
कि सारा विश्व तुम्हे देखता ही रह जाये

तुझ मे लक्ष्मी बाई है , वीरांगना अवंतिका
और दूसरी ओर तू ही ह , प्रेम पूरित लतिका
सबल कार्यकारिणी , प्रेम रूप धारिणी ,
सृष्टि की  जननी तू , संसार तुझ पे गर्विता

-जागेश