मधुवन उपवन , पुलकित तनमन
नदिया सागर पर्वत सुंदरवन
अंकुरित हुयी पुष्पित चेष्टा
भ्रमण चेष्टा , अंतर्मन चेष्टा
घुप अँधेरा और चमचम का फेरा
दुनिया रंगीन बेरंग सवेरा
सूरज की किरणों सी चटकी चेष्टा , रंगीन चेष्टा
भटकी चेष्टा , हसीन चेष्टा
देख क्षणिक चेष्टा का दर्पण
चेष्टा करदे खुद को अर्पण
अनजान चेष्टा , नादान चेष्टा
जन से बढकर आन चेष्टा
मन में ये तू ठान चेष्टा
तीर चेष्टा ,कमान चेष्टा
कट सके सबको जो ,
ऐसी ह तलवार चेष्टा
रेंगती चीटी, मकड़ी की कोशिश
गगन चुम्बी छलांग चेष्टा i
Jagesh Jags
Jagesh Jags