Straight from the core heart....

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Wednesday, August 7, 2013

लतिका


स्वछंद हवा  मे  , अनंत  आकाश मे
अपने  नयनो  मे भरपूर  उजाला भर
अपने पंखो को नयी ऊर्जा  से सक्षम कर
क्षितिज के उस पार , इतनी  ऊँची उड़ान भर
की सारा विश्व तुम्हे देखता ही रह जाये

उत्साह का ताना बना , साधना का बाना सजा
जीत का संसार बुन , गुनगुना अपनी ही धुन
ज़माने से न तू डर , सामना ह्रदय से कर
सम्पूर्ण आलेख मे कर अपने हस्ताक्षर

भटक तू आज दर बदर , मार्ग अपना प्रशस्त कर
सातों सागर पे अपना नाम लिख ,
 सातों आसमान पार कर
 जिसे देख सदियों तक लोग
मंत्रमुग्ध ही रह जाये

मन की वीणा के तार को
फिर एक बार झंकृत कर
स्वरमय बना  दे  कर्मभूमि  तू ,
बहने दे सुमधुर स्वर लहर
कि सारी सृष्टि उसके सम्मोहन मे डूब जाये
कि सारा विश्व तुम्हे देखता ही रह जाये

तुझ मे लक्ष्मी बाई है , वीरांगना अवंतिका
और दूसरी ओर तू ही ह , प्रेम पूरित लतिका
सबल कार्यकारिणी , प्रेम रूप धारिणी ,
सृष्टि की  जननी तू , संसार तुझ पे गर्विता

-जागेश

Thursday, April 25, 2013

फिर तेरी तस्वीर देखी ,  दिल मेरा तस्वीर हो गया ।

आंखे  तेरी  आशिक  हुई , मन मेरा फकीर  हो गया ॥ 

Thursday, February 21, 2013

"मेरी गुडिया अब बड़ी हो गयी है"

देख रहा था
आज अपनी  गुडिया को
सजते संवरते
शीशे में खुद को निहारते
नयनो में आस का काजल लगाते ,

उसके दुपट्टे को बार बार सरकते
और फिर अपनी उलझी लटो  को सुलझाते !

मुझसे अपनी बात छिपाते
अकेले में खुद से सवाल करते
फिर शरमा के सर को झुकाते !
हँसकर  बोल दे अपने दिल की हर बात 
और फिर कभी स्तब्ध मौन हो जाते
कभी कभी आँखों से आंसु बहाते
कभी अपनी सखियों संग हँसते खिलखिलाते !

देखकर उसको लगता है मुझे ,
प्यार में और भी  प्यारी हो  गयी है
मेरी गुडिया अब बड़ी हो  गयी है !!!

                                                          -Jagesh 

Tuesday, February 19, 2013

तेरी झलक

 कल्पवृक्ष  की सोनजुही तू ,अमलतास की अमल कली
तेरी आंख खुली तो सुबह हुयी , जो पलक झुके तो शाम ढली !
 सरकार की नाराजगी कुछ ऐसी हुयी की
मौसम ने भी रुख  बदल लिया
आसमा ने आंसू बहा दिए ,बादल  चीखने  लगे !
अब तुम जरा सी मुस्कुरा दी तो सूरज भी बादलो के पीछे से तुम्हे देखने लगा "-
सूरज ही नहीं  हवा भी झूम उठी ,तेरी मुस्कान  का जादू कुछ ऐसा चला
कि  पत्ते  नाचने लगे  और पंछी गाने लगे ,
भँवरे फूलो पे मडराने लगे ,
कभी धुप कभी छाव  ,तो कभी बारिश
सब तेरी झलक पाने के लिए कुदरत के बहाने लगे !

खबर मिली है'- नदिया , झरने
फूल बगीचे , सावन के पंछी
बारिश बादल , मोर पपीहा
वंशीवट की वंशी
म्रदुभासी  म्रदु गान कर रहे
कपटी  सब चालाक  हुए है
सब तुझको प्यार  कर रहे !!
                                                           -Jagesh