स्वछंद हवा मे , अनंत आकाश मे
अपने नयनो मे भरपूर उजाला भर
अपने पंखो को नयी ऊर्जा से सक्षम कर
क्षितिज के उस पार , इतनी ऊँची उड़ान भर
की सारा विश्व तुम्हे देखता ही रह जाये
उत्साह का ताना बना , साधना का बाना सजा
जीत का संसार बुन , गुनगुना अपनी ही धुन
ज़माने से न तू डर , सामना ह्रदय से कर
सम्पूर्ण आलेख मे कर अपने हस्ताक्षर
भटक तू आज दर बदर , मार्ग अपना प्रशस्त कर
सातों सागर पे अपना नाम लिख ,
सातों आसमान पार कर
जिसे देख सदियों तक लोग
मंत्रमुग्ध ही रह जाये
मन की वीणा के तार को
फिर एक बार झंकृत कर
स्वरमय बना दे कर्मभूमि तू ,
बहने दे सुमधुर स्वर लहर
कि सारी सृष्टि उसके सम्मोहन मे डूब जाये
कि सारा विश्व तुम्हे देखता ही रह जाये
तुझ मे लक्ष्मी बाई है , वीरांगना अवंतिका
और दूसरी ओर तू ही ह , प्रेम पूरित लतिका
सबल कार्यकारिणी , प्रेम रूप धारिणी ,
सृष्टि की जननी तू , संसार तुझ पे गर्विता
-जागेश


