
"दृष्टिकोण "
अपनी पूरी तन्मयता से, ख्वाब सजाती करती अर्पित।
बस यही सोचती है वो हर पल ,कैसे लगे भविष्य की आँख में काजल
फैशन जगत का केंद्र बिंदु अपना कार्यस्थल
विश्व का सर्वोच्च स्थान है अपना कल।
बस एक दशक की सीमा लाँघ ,
देता विश्व को ख्याति और प्रतिष्ठा की ललकारमेरे दृष्टिकोण में मेरा निफ्ट
भारतीय संस्कृति की मारता हुंकार।
बड़ी अट्टालिकाओं और आधुनिकता का जो न हो मोहताज
मेरे दृष्टिकोण में ,
नयी नयी तकनीको का कर स्वागत ,
निफ्ट बदलता अपना आज।
मेरे दृष्टिकोण में मेरा निफ्ट प्रांगण ,किये सुशोभित कई आभूषण
हरे वस्त्रो का ऐसा है आवरण , जिसे देख खुश होता पर्यावरणजिसे देख हँसता पर्यावरण।
कुछ करने कि होड़ में जब ये मंडली जुटती एक बार ,
नयी तकनीक और नए विचारो का लगता अम्बार
जिसे देख नतमस्तक होता संसार।
देश विदेश के दूर सुदूर में बसी कला को
उन्नत करने का सपना देखा है ,
अपने इस दृष्टिकोण में मैंने
हर कलाकार को अपना बनते देखा है
हम महनत और लगन से एक ऐसा बाजार सजायेंगे
जहाँ मिटटी भी होगी मूल्यवान ,
जिसे देख सभी करे गुणगान
फैशन जगत में हम अपना परचम लहराएंगे
हम निफ्ट को खूब सजायेंगे , हम निफ्ट को खूब सजायेंगे।-
जागेश्वर
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