हमारी नज़्म मे वो दर्द आता नहीं तो क्या करें,
दिल तोड़ कर बैठे हैं वफ़ा क्या करें ।
हमें तो धूप में भी छांव की ख्वाहिश नहीं,
तेरी जुल्फ़ों के साए की आशा क्या करें ।
खुशबू में तेरी बाहों की खोए इस तरह,
अब दिल बटोरें या दुआ करें ।
वफ़ा तुझसे ही नही, तेरी तस्वीर से भी है...
... अब उससे ही दर्द-ए-दिल बयां करें ।
तू दूर खुश है, खुश रह ’दीपक’,
अब नज़्म और सपनों मे हम जिया करें ।
-Deepak Tripathi
दिल तोड़ कर बैठे हैं वफ़ा क्या करें ।
हमें तो धूप में भी छांव की ख्वाहिश नहीं,
तेरी जुल्फ़ों के साए की आशा क्या करें ।
खुशबू में तेरी बाहों की खोए इस तरह,
अब दिल बटोरें या दुआ करें ।
वफ़ा तुझसे ही नही, तेरी तस्वीर से भी है...
... अब उससे ही दर्द-ए-दिल बयां करें ।
तू दूर खुश है, खुश रह ’दीपक’,
अब नज़्म और सपनों मे हम जिया करें ।
-Deepak Tripathi
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