जिसके लिए मेरा ये मन गीत हमेशा गाता है ,
-माँ है मेरी
जो अदभुत एक गाथा है ,
जिसे सोच मेरा मन हर्षाता है
काँटों भरी राहों में फूलो का एहसास है,
सुन माँ मेरी,
तू गैरों की दुनिया में अपनों का विश्वास है
मुख से निकला पहला लब्ज तू ,
धरती पर इश्वर की कहानी है
इक माँ तू ही सब कुछ है मेरी ,
बाकि ये दुनिया तो बेमानी है
तू बहती हुई नदी की एक धारा है ,
कही एकांत में बना स्वछन्द किनारा है ,
सरपट दौड़ती दुनिया की थकान का
तू ही तो एक सहारा है
तेरी ममता की पावन ,
बोली है मनभावन
बड़ा हुआ हु पकड़ के तेरा आँचल ,
जीवन भर न छोडूंगा तेरा दामन
Jagesh Jags

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